घरवालों ने ठुकराया, देश ने अपनाया, ट्रांसजेंडर बना पायलट…

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भले ही हमारा समाज आज विज्ञान और आधुनिकता के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार है। लेकिन अभी भी कहीं ना कहीं कुछ ऐसी चीजें हैं जो हमारे समाज को पीछे ढकेलती है। यह हमारे समाज के कुछ लोगों की छोटी सोच जो उन्हें कभी भी आगे बढ़ने नहीं देती।

आज भी हमारे समाज में ट्रांसजेंडर हो बहुत ही नीची दृष्टि से देखा जाता है। हमारे समाज में ट्रांसजेंडर होना गुनाह माना जाता है। लोग उन्हें इंसान नहीं समझते और उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। भले ही वह ट्रांसजेंडर उनके मोहल्ले का, उनके घर का या खुद उनका बेटा ही क्यों ना हो, लोग उसका जीना मुश्किल कर देते हैं। यहां तक कि कुछ लोग तो ट्रांसजेंडर को अपने घर से भी बाहर निकाल देते हैं।

एक ऐसा ही मामला सामने आया है केरल से जहां, जब एडम के माता-पिता को यह पता चला कि वह ट्रांसजेंडर है तो उन्होंने उसे घर से ही निकाल दिया। उस वक्त एडम के पास ना ही कोई काम था और ना ही पैसे जिसकी वजह से उन्होंने अपने जीवन की कई दिन और रातें सड़कों पर गुजारी है और कुछ समय बाद उन्होंने एक जूस की दुकान पर काम करना शुरू कर दिया।

वहीं उन्होंने सोशल जस्टिस विभाग से अपनी पढ़ाई के लिए मदद मांगी। तब उन्होंने एडम को एविएशन एकेडमी ज्वाइन करने की सलाह दी। एडम का सपना था कि वह कमर्शियल पायलट बने। अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने प्राइवेट पायलट लाइसेंस का प्रशिक्षण लिया। साल 2017 में उन्हें जोहान्सबर्ग में लाइसेंस भी मिल गया। वह अपनी खुशी अपने माता-पिता के साथ बांटना चाहते थे लेकिन अब वह अकेले थे।

एडम को एविएशन एकेडमी ज्वाइन करने में भी अपने ट्रांसजेंडर होने की वजह से कई समस्याओं का सामना करना पड़ा, लेकिन तब एक शिक्षक ने उनकी मदद की थी। एडम के इस परेशानी के वक़्त में केरल सरकार ने उन्हें मदद की। उन्हें राज्य सामाजिक न्याय डिपार्टमेंट की तरफ से 22.34 लाख रुपये की स्कॉलरशिप मिली। इस पैसे की मदद से उन्होंने कमर्शियल पायलट का कोर्स पूरा किया।

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