दिल्ली-जयपुर हाइवे एक तरफ से खोला गया; जाने क्या है किसानों का ट्रैक्टर मार्च, उससे जुडी अहम बातें।

खुला दिल्ली-जयपुर हाइवे जानिए मामले  से जुड़ी अहम जानकारियां :

राजस्थान-हरियाणा के सीमा पर शाहजहांपुर से किसानों के द्वारा ट्रैक्टर मार्च शुरू करने के बाद यह  आंशिक रूप से तीन घंटे तक ही बंद किए गए इसके बाद दिल्ली-जयपुर राजमार्ग को खोल दिया गया है. केंद्र के द्वारा विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का 18 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन जारी है. दिल्ली चिल्ला तथा -नोएडा सीमा से किसानों के नाकाबंदी हटाने के बाद राजमार्ग को खोला गया. इस बीच, दिल्ली जाने वाले हजारों किसान, हरियाणा की रेवाड़ी सीमा पर पहुंच गए, जहां पुलिस ने उन्हें राज्य में प्रवेश करने से रोकने के लिए दिल्ली-जयपुर राजमार्ग के दोनों किनारों पर रोक दिया. किसान संगठनों ने सोमवार के लिए एक राष्ट्रव्यापी विरोध की योजना बनाई है.iske अंतर्गत  उनकी आय में कमी आएगी और निजी कंपनियों को उपज की खरीद में ज्यादा फायदा पहुंचाने की बात कही गई है.नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों का कहना है कि इससे हमारी आय में आय में कमी आएगी और निजी कंपनियों को उपज की खरीद में ज्यादा फायदा पहुंचाने की बात कही गई है।

kisan morcha

जाने  क्या है  मुख्य बातें

मामले से जुडी बातें जो की निम्न है । जो  की किसानो की मांग है

          माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानूनों का दृढ़ता से बचाव किया है, उन्होंने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार की पहल “किसानों की आय में वृद्धि और उन्हें और अधिक समृद्ध बनाएगी. ” पीएम ने कहा “इन सुधारों से किसानों को नए बाजार, प्रौद्योगिकी के लाभ और निवेश लाने में मदद मिलेगी. यह मेरे देश के किसान हैं जो सभी से सबसे अधिक लाभान्वित होंगे.”

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि वह प्रदर्शनकारी किसानों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए कल उपवास करेंगे और दूसरों से भी ऐसा करने की अपील करेंगे.एक वीडियो संदेश में केजरीवाल ने कहा,  “भाजपा के नेता और कुछ केंद्रीय मंत्री बार-बार कह रहे हैं कि किसान देशविरोधी. मैं उनसे पूछना चाहता हूं – हजारों सेवानिवृत्त सैनिक किसानों के साथ सीमाओं पर बैठे हैं. क्या वे देश-विरोधी हैं? वे खिलाड़ी जो भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं और अपने पदक लौटा दिए  क्या वे देश-विरोधी हैं?

सुप्रीम कोर्ट बुधवार को विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. पहली याचिका दिल्ली के एक छात्र द्वारा दायर की गई जिसमें कहा गया कि किसानों को स्थानांतरित किया जाए क्योंकि वे कोविड महामारी से निपटने के लिए आवश्यक आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को रोक रहे हैं. दूसरी याचिका में दिल्ली और हरियाणा में पुलिस द्वारा बल प्रयोग का हवाला देते हुए किसानों के लिए मुआवजे की मांग की गई है. जबकि तीसरी याचिका में मांग की गई है कि पुलिस द्वारा अवरुद्ध किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति दी जानी चाहिए.

गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले हफ्ते किसान नेताओं से मुलाकात की, यह विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से केंद्र सरकार की उच्चतम स्तर की बैठक थी- लेकिन एक बार फिर से कोई सफलता नहीं मिली.  किसानों ने कानूनों के अधिक वर्गों में संशोधन करने के लिए केंद्र के प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और तीनों कानून वापस लेने की मांग की.

राजस्थान से किसानों का मार्च सुबह शाहजहांपुर से शुरू हुआ था, जो दिल्ली से लगभग 120 किलोमीटर दूर है. 800-900 के समूह का नेतृत्व स्वराज इंडिया के प्रमुख योगेंद्र यादव कर रहे हैं. समूह के साथ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर भी हैं.

 

तस्वीरों में किसानों को तख्तियां ले जाते हुए और नारे लगाते हुए देखा जा सकता है. वे धीरे-धीरे हाईवे पर चले गए. तिरपाल से ढके ट्रेलरों को खींचने वाले ट्रैक्टर और कारों का रेला भी दिखाई दिया जिनकी खिड़कियों के बाहर बैनर टंगे थे.

 

हरियाणा की सीमा पर रेवाड़ी में किसानों को रोक दिया गया है, जहां पुलिस ने नाकेबंदी कर रखी है. पंजाब के किसानों के विपरीत, वे किसी भी प्रावधान के साथ मार्च नहीं कर रहे हैं. लेकिन यह अब तक एक बाधा नहीं है, क्योंकि स्थानीय लोगों ने प्रदर्शनकारियों को ट्रकों में भरते हुए, खाद्य और पेय की आपूर्ति पहुंचाना शुरू कर दिया है.

प्रदर्शनकारी किसानों का एक अन्य समूह राजस्थान के नीमराणा से हरियाणा की सीमा तक मार्च करने की कोशिश कर रहा है. कांग्रेस शासित राज्य के किसानों के एक वर्ग ने फैसला किया है कि वे अपना विरोध प्रदर्शन बढ़ाने से पहले केंद्र को कुछ और समय देंगे.

यह कहते हुए कि शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा, किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा, जो सिंहू में दिल्ली-हरियाणा सीमा पर डेरा डाले हुए हैं, ने NDTV को बताया: “सरकार को किसानों के धैर्य का परीक्षण नहीं करना चाहिए। पहले उन्होंने किसानों को पाकिस्तानी कहा और फिर कहा कि चीन इस आंदोलन को चला रहा है और अब वे कह रहे हैं कि नक्सली यहां नारे लगा रहे हैं.”

किसानों का कहना है कि वे केंद्र के साथ बातचीत जारी रखने के इच्छुक हैं, इसलिए जब तक विवादास्पद कानूनों को रद्द करने के साथ बातचीत शुरू नहीं हो जाती. उन्होंने केंद्र सरकार पर किसान आंदोलन को कभी पंजाब के अतिवादी गुटों के साथ जोड़ने, कभी नक्सली गतिविधियों में शामिल लोगों के साथ जोड़ने तो कभी चीन और पाकिस्तान द्वारा समर्थित आंदोलन कहकर बदनाम करने के भी आरोप लगाए हैं.

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