आज दिनांक 17/10/2020 से शुरू हो रही है 2020 की नवरात्रि! जानिए नवरात्रि से जुड़े इतिहास, तथ्य, उत्सव और महत्त्व

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अश्विन (अक्टूबर) मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपाद तिथि में मनाया जाने वाला नवरात्रि का त्योहार हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इसे भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि शब्द संस्कृत भाषा के दो शब्दों- ‘नव’ यानी नौ(9) और ‘रात्रि’ यानी रात से मिलकर बना है। भारत के विभिन्न भागों में इसे अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। बहुत से हिस्सों में लोग सात दिनों तक व्रत रखते हैं और नवरात्रि के आखिरी दिन व्रत तोड़ते हैं। इस उत्सव के उपलक्ष्य में गरबा नृत्योत्सव आयोजित किए जाते हैं। लोग अपने दोस्तों और परिवारों के साथ गरबा खेले जाते हैं, और उत्सव मनाते है

जानिए क्यों मनाया जाता है नवरात्रि का त्यौहार

नवरात्रि का त्योहार देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध का उत्सव मनाता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।s नवरात्रि के इतिहास के बारे में ऐसा कहा जाता है की महिषासुर नामक राक्षस को देवी दुर्गा ने पराजित किया था। महिषासुर को ब्रह्म देव से अमरता का वरदान प्राप्त था। इस अमरत्व की शर्त यही थी कि महिसाषुर को सिर्फ कोई स्त्री ही पराजित कर सकती थी।
अमरत्व का वरदान पाकर महिषासुर निरंकुश या निडर हो गया और उसने तीनों लोकों- पृथ्वी, आकाश और पाताल पर आक्रमण कर दिया। चुंकि महिषासुर को सिर्फ एक स्त्री ही पराजित कर सकती थी इसलिए देवता भी युद्ध नहीं कर सकते थे। ऐसे में देवताओं ने ब्रम्हा,विष्णु,महेश से प्रार्थना की और महिषासुर को हराने के लिए उनकी मदद मांगी। विष्णु देव ने निर्णय लिया कि महिषासुर को हराने के लिए वे एक स्त्री का निर्माण करेंगे। इस देवी में ब्रह्म देव और शंकर देव ने भी अपनी शक्तियों को डाला। देवी दुर्गा ने महिषासुर से युद्ध किया। तीनों लोकों को हिला देने वाला यह युद्ध 15 दिनों तक चला। युद्ध के दौरान महिषासुर निरंतर अपने रूप बदलता रहा। अंत में एक भैंसे का रूप धारण परने पर देवी दुर्गा ने उसकी छाती पर त्रिशूल से वार करके उसे पराजित किया। इसी के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत की स्थापना हुयी।

जानिए कब है नवरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त

पहले दिन की पूजा का शुभ मुहुर्त सुबह 6.30 से 10.30 बजे तक का है। साल 2020 की नवरात्रि की पूजा का कार्यक्रम-
प्रतिपाद घटास्थापना- 17 अक्टूबर 2020
द्वितीय मां ब्रह्मचारिणी पूजा- 18 अक्टूबर 2020
मां चंद्रघंटा पूजा- 19 अक्टूबर 2020
चतुर्थी मां कूष्मांडा पूजा- 20 अक्टूबर 2020
पंचमी मां स्कंदमाता पूजा- 21 अक्टूबर 2020
षष्ठी मां कात्यानी पूजा- 22 अक्टूबर 2020
सप्तमी मां कालरात्रि पूजा- 23 अक्टूबर 2020
अष्टमी मां महागौरी दुर्गा महा नवमी पूजा- 24 अक्टूबर 2020

क्या आपको पता हैं?

नवदुर्गा हिन्दू धर्म में माता दुर्गा अथवा पार्वती के नौ रूपों को एक साथ कहा जाता है। इन नवों दुर्गा को पापों के विनाशिनी कहा जाता है, हर देवी के अलग अलग वाहन हैं, अस्त्र शस्त्र हैं परंतु यह सब एक हैं। इन्ही नवो देवी का नवरात्र के 9 दिनों तक चलने वाली इस त्यौहार में मां शक्ति के नौरूपों की आराधना की जाती है जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है .दुर्गाजी के नवो स्वरूप में पहले ‘शैलपुत्री’ के नाम से जानी जाती हैं दूसरे में ब्रम्ह्चारिणी ,तीसरे दिन चंद्र घंटा माँ ,तथा चौथे दिन कुष्मांडा माँ पांचवे दिन स्कन्द माता छठे दिन कात्यायनी माता तथा सातवे दिन कालरात्रि माँ और आठवें दिन महागौरी था अंतिम दिन में सिद्धि दात्री माँ जो की माँ दुर्गा के नैव स्वरुप है उनका पूजन करते है।

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।तृतीयं चन्द्रघंटेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।पंचमं स्क्न्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च ।सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।। नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।।

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