अफगानिस्तान में भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी की हुई हत्या, तालिबान ने किया था हमला

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अफगानिस्तान में अभी युद्द जैसे हालात बने हुए है, यहां पर कई इलाकों में तालिबानियों का कब्जा है।  ऐसे हालात में पुलित्जर पुरस्कार विजेता भारतीय फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की अफगानिस्तान में हत्या कर दी गई है, इस घटना को वहा के कंधार के स्पिन बोल्डक इलाके में एक झड़प के दौरान अंजाम दिया गया है।

आपको बता दे की तालिबान ने स्पिन बोल्डक इलाके के मेन मार्केट एरिया पर कब्जा कर लिया था, उसके बाद उसे छुड़ाने के लिए अफगान सेना द्वारा कार्यवाही की जा रही थी। एक दूसरे की तरह से क्रॉस फायरिंग के दौरान दानिश और एक सीनियर अफगानी अधिकारी की मौत हो गई।  यह वहा पर न्यूज़ रिपोर्टिंग करने के लिए गए थे। एक अफगानी कमांडर ने रॉयटर्स को बताया कि दानिश दुकानदारों से बात कर रहे थे, उसी समय तालिबान ने फिर से हमला कर दिया, जिसमे उनकी मोत हो गयी।

कंधार में कवरेज के दौरान भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी की हत्या

दानिश सिद्दीकी  बड़े पत्रकार थे

दानिश सिद्दीकी की हत्या होए के बाद उनके चले जाने का सभी को दुःख हुआ है।दानिश सिद्दीकी की हत्या एक दुखद खबर खबर है। दानिश सिद्दीकी  भारतीय पत्रकार और पुलित्जर पुरस्कार विजेता अफगान सुरक्षा बलों के साथ जुड़े हुए थे। दानिश सिद्दीकी की गिनती दुनिया के बेहतरीन फोटो जर्नलिस्ट्स में होती थी. इन्होने साल 2018 में Pulitzer Prize से नवाजा गया था, इस अवार्ड को उन्हें रोहिंग्या मामले में कवरेज के लिए दिया गया था। यह दुनिया में जाने माने पत्रकार माने जाते थे। वर्तमान में वह अंतरराष्ट्रीय एजेंसी Reuters के लिए काम कर रहे थे। जिसके लिए अफगानिस्तान में जारी हिंसा की कवरेज के लिए वहा पर गए थे।

सभी ने दी श्रद्धांजलि

उनकी मृत्यु के बाद दानिश को उनके साथ काम करने वाले पत्रकार द्वारा श्रद्धांजलि दी गयी है। इसके साथ ही इंडिया टुडे के ग्रुप फोटो एडिटर बंदीप सिंह ने दानिश को याद करते हुए कहा कि वह इस खबर को सुनकर हैरान हैं। रोहिंग्या संकट के दौरान उनके काम ने हर किसी का ध्यान उनकी और खींचा था।  लद्दाख में चीन के साथ हुई हिंसा के दौरान उन्होंने साथ में काम भी किया था।

उनकी आखिरी स्टोरी

दानिश ने कुछ दिन पहले ही अपने ट्विटर अकाउंट पर अफगानिस्तान की एक फोटो और वीडियो साझा किए थे। यह उनके द्वारा की गयी आखरी पोस्ट थी। इस फोटो में अफगान कमांडो कंधार के बाहरी इलाके में तालिबान विद्रोहियों के चंगुल में फंसे एक घायल पुलिसकर्मी को निकालने की कोशिश कर रहे थे। इसके साथ ही उन्होंने बताया था की 13 जून को विशेष बल के साथ यात्रा कर रहे थे, जहा एक रॉकेट के कवच को ऊपर से टकराते हुए कैप्चर कर पाया था।

 

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